हिन्दू धर्म (संस्कृत: सनातन धर्म) एक धर्म (या, जीवन पद्धति) है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत ,नेपाल और मॉरिशस में  विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है।
हिन्दू धर्म chart 
बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है।
यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है।
इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति

इतिहास

सनातन धर्म पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है; हालाँकि इसके इतिहास के बारे में अनेक विद्वानों के अनेक मत हैं। आधुनिक इतिहासकार हड़प्पा, मेहरगढ़ आदि पुरातात्विक अन्वेषणों के आधार पर इस धर्म का इतिहास कुछ हज़ार वर्ष पुराना मानते हैं। जहाँ भारत (और आधुनिक पाकिस्तानी क्षेत्र) की सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिह्न मिलते हैं। इनमें एक अज्ञात मातृदेवी की मूर्तियाँ, भगवान शिव पशुपति जैसे देवता की मुद्राएँ, शिवलिंग, पीपल की पूजा, इत्यादि प्रमुख हैं। इतिहासकारों के एक दृष्टिकोण के अनुसार इस सभ्यता के अन्त के दौरान मध्य एशिया से एक अन्य जाति का आगमन हुआ, जो स्वयं को आर्य कहते थे और संस्कृत नाम की एक हिन्द यूरोपीय भाषा बोलते थे। एक अन्य दृष्टिकोण के अनुसार सिन्धु घाटी सभ्यता के लोग स्वयं ही आर्य थे और उनका मूलस्थान भारत ही था।
आर्यों की सभ्यता को वैदिक सभ्यता कहते हैं। पहले दृष्टिकोण के अनुसार लगभग 1700 ईसा पूर्व में आर्य अफ़्ग़ानिस्तान, कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में बस गए। तभी से वो लोग (उनके विद्वान ऋषि) अपने देवताओं को प्रसन्न करने के लिए वैदिक संस्कृत में मन्त्र रचने लगे। पहले चार वेद रचे गए, जिनमें ऋग्वेद प्रथम था। उसके बाद उपनिषद जैसे ग्रन्थ आए। हिन्दू मान्यता के अनुसार वेद, उपनिषद आदि ग्रन्थ अनादि, नित्य हैं, ईश्वर की कृपा से अलग-अलग मन्त्रद्रष्टा ऋषियों को अलग-अलग ग्रन्थों का ज्ञान प्राप्त हुआ जिन्होंने फिर उन्हें लिपिबद्ध किया। बौद्ध और धर्मों के अलग हो जाने के बाद वैदिक धर्म में काफ़ी परिवर्तन आया। नये देवता और नये दर्शन उभरे। इस तरह आधुनिक हिन्दू धर्म का जन्म हुआ।
दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार हिन्दू धर्म का मूल कदाचित सिन्धु सरस्वती परम्परा (जिसका स्रोत मेहरगढ़ की 6500 ईपू संस्कृति में मिलता है) से भी पहले की भारतीय परम्परा में है।
                                                                              


भविष्यवाणियां


  • एक दिन हिन्दुत्व के आगे सभी को झुकना होगा : फ्रांस के नोबल पुरस्कार विजेता दार्शनिक रोमां रोला ने विश्व में हिन्दू धर्म को सर्वश्रेष्ठ माना है। उन्होंने लिखा, 'मैंने यूरोप और मध्य एशिया के सभी मतों का अध्ययन किया है, परंतु मुझे उन सब में हिन्दू धर्म ही सर्वश्रेष्ठ  दिखाई देता है...मेरा विश्वास है कि इसके सामने एक दिन समस्त जगत को झुकना पड़ेगा। पृथ्वी पर केवल एक स्थान है जहां के जीवित व्यक्तियों ने प्राचीन काल में अपने स्वप्नों को साकार किया, वह है भारत।- (प्रोफेट्स ऑफ द न्यू इंडिया, प्रील्यूड, पृ. 51) 
  • यहां झुकने का अर्थ हिंसा या धर्मांतरण के बल पर नहीं, बल्कि सच्चे ज्ञान के आगे झुकने की बात है। सत्य, अहिंसा, प्रेम, स्वतंत्रता और मोक्ष ही धर्म का सच्चा मार्ग होता है। असल में धर्म के यही आधार होना चाहिये। हिन्दू धर्म में व्यक्ति की निजता का सम्मान किया जाता है। वहां किसी भी प्रकार का सामाजिक दबाव नहीं बल्कि स्वयं की खोज पर बल दिया जाता है
  • नास्त्रेदमस की हिन्दू धर्म के संबंध में भविष्यवाणी : नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी की किताब सेंचुरी में लिखा है कि 'सागरों के नाम वाला धर्म, चांद पर निर्भर रहने वालों के मुकाबले तेजी से पनपेगा और उसे भयभीत कर देंगे 'ए' तथा 'ए' से घायल दो लोग।' (x-96)। 
  • चांद पर आधारित धर्म एक ही है इस्लाम और दुनिया में जितने भी सागर हैं उनमें से सिर्फ हिन्द महासागर के नाम पर ही एक धर्म है जिसे हिन्दू धर्म कहते हैं। आगे के वाक्य की व्याख्या करना कठिन है़, लेकिन नास्त्रेदमस ने अपनी और भी भविष्यवाणियों में हिन्दू धर्म के उत्थान की बात कही है।
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  • 'लाल के खिलाफ एकजुट होंगे लोग, लेकिन साजिश और धोखे को नाकाम कर दिया जाएगा।' 'पूरब का वह नेता अपने देश को छोड़कर आएगा, पार करता हुआ इटली के पहाड़ों को और फ्रांस को देखेगा। वह वायु, जल और बर्फ से ऊपर जाकर सभी पर अपने दंड का प्रहार करेगा।' 
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  • 'तीन ओर घिरे समुद्र क्षेत्र में वह जन्म लेगा, जो बृहस्पतिवार को अपना अवकाश दिवस घोषित करेगा। उसकी प्रसंशा और प्रसिद्धि, सत्ता और शक्ति बढ़ती जाएगी और भूमि व समुद्र में उस जैसा शक्तिशाली कोई न होगा।' (सेंचुरी 1-50वां सूत्र) 
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  • तीन ओर समुद्र से तो भारत ही घिरा हुआ है। भारत में गुरुवार एक ऐसा वार है जिसे सभी धर्म के लोग समान रूप से मानते हैं। गुरुवार का दिन केवल हिन्दू धर्म में ही पवित्र माना जाता है। इसका कारण यह है कि गुरुवार की दिशा ईशान कोण है और ईशान कोण में ही देवताओं का वास होता है। मुस्लिम धर्म में शुक्रवार को, यहूदियों में शनिवार को और ईसाइयों में रविवार को पवित्र माना जाता है। हालांकि अभी इस भविष्यवाणी के पूर्ण होने का इंतजार है कि कौन करेगा गुरुवार को अपना अवकाश दिवस घोषित? 
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  • 'पांच नदियों के प्रख्‍यात द्वीप राष्ट्र में एक महान राजनेता का उदय होगा। इस राजनेता का नाम 'वरण' या 'शरण' होगा। वह एक शत्रु के उन्माद को हवा के जरिए समाप्त करेगा और इस कार्रवाई में 6 लोग मारे जाएंगे।' (सेंचुरी v-27)
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  • भारत में वैसे तो कई प्रसिद्ध नदियां हैं- गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा आदि, लेकिन पंजाब ऐसा क्षेत्र है जिसे 5 नदियों की भूमि भी कहा जाता है। पंजाब अर्थात जहां 5 नदियां बहती हों। पूर्व में इसे पंचनद प्रदेश भी कहा जाता था। पंजाब प्राचीनकाल से धरती की राजनीति का मुख्य केंद्र भी रहा है। ये 5 नदियां हैं- सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम। इन पांचों नदियों का उल्लेख वेदों में भी मिलता है। तो क्या पंजाब से होगा महान राजनेता? पंजाब के इतिहास को देखें तो गुरुनानक देव, गुरु तेगबहादुर, गुरु गोविंदसिंह जैसी महान विभूतियों का इसी क्षेत्र से ताल्लुक है।
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  • 8. 'शीघ्र ही पूरी दुनिया का मुखिया होगा महान 'शायरन' जिसे पहले सभी प्यार करेंगे और बाद में वह भयंकर व भयभीत करने वाला होगा। उसकी ख्याति आसमान चूमेगी और वह विजेता के रूप में सम्मान पाएगा।' (v-70)...'एशिया में वह होगा, जो यूरोप में नहीं हो सकता। एक विद्वान शांतिदूत सभी राष्ट्रों पर हावी होगा।' (x-75)।
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  • उक्त भविष्यवाणी से लगता है कि उस 'महापुरुष' का नाम 'श' से शुरू होगा। 'वरण' या 'शरण' जैसे नाम तो भारत में ही होते हैं, लेकिन 'शायरन' नाम जरूर अजीब है। नास्त्रेदमस ने अंग्रेजी में cheyren लिखा है। इस दौरान 'एलस' नाम से एक और व्यक्ति होगा जिसकी बर्बरता के बारे में लिखा गया है- 'उसका हाथ अंतत: खूनी एलस (ALUS) तक पहुंच जाएगा। समुद्री रास्ते से भागने में भी नाकाम रहेगा। 2 नदियों के बीच सेना उसे घेर लेगी। उसके किए की सजा क्रुद्ध काला उसे देगा।' -(6-33)
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  • 'पैगंबर के कुल नाम के अंतिम अक्षर से पहले के नाम वाले सोमवार को अपना अवकाश दिवस घोषित करेगा। अपनी सनक में वह अनुचित कार्य भी करेगा। जनता को करों से आजाद कराएगा।' (1-28) ...पैगंबर तो एक ही हैं मुहम्मद। उनके कुल का नाम हाशमी था। हाशमी के अंतिम अक्षर के पहले 'श' यानी जिस नेता के प्रादुर्भाव की बात कही जा रही है उसका नाम 'श' से शुरू होना चाहिए। यदि हम कुल का नाम न मानें तो मुहम्मद के अंतिम अक्षर के नाम के पहले 'म' आता है।
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  • नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों के ज्ञाता महाराष्ट्र के ज्योतिषाचार्य डॉ. रामचन्द्र जोशी ने इस पर मराठी में एक पुस्तक लिखी है जिसमें वे नास्त्रेदमस की सेंचुरी का हवाला देते हुए लिखते हैं कि 'ठहरो स्वर्णयुग (रामराज्य) आ रहा है। एक अधेड़ उम्र का औदार्य (उदार) अजोड़ अधाप महासत्ता अधिकारी भारत ही नहीं, सारी पृथ्वी पर स्वर्ण युग लाएगा और अपने सनातन धर्म का पुनरुत्थान करके यथार्थ भक्ति मार्ग बताकर सर्वश्रेष्ठ हिन्दू राष्ट्र बनाएगा। तत्पश्चात ब्रह्मदेश, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत, अफगानिस्तान, मलाया आदि देशों में वही सार्वभौम धार्मिक नेता होगा। सत्ताधारी चांडाल-चौकड़ियों पर उसकी सत्ता होगी। वह नेता 'शायरन' दुनिया की आशा मालूम होता है, बस देखते रहो।'
  • रशिया में होगा हिन्दुत्व : नास्त्रेदमस ने ये भी भविष्यवाणी की थी कि एक नेता जो कि भारत के दक्षिणी  भाग से होगा वह पूरे एशिया महाद्वीप को एक कर देगा। मगर उनकी भविष्यवाणी मैं सब से ज्यादा चौंकाने वाली भविष्यवाणी ये है जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस साम्यवाद त्यागकर हिन्दू धर्म अपना लेगा। भारत कि सेना अपनी पुरानी गलतियों को सुधारते हुए अरब देशों में अपना परचम लहराएगी और रूस भी  उस मैं साथ देगा। 
  •  *भविष्य वक्ता ऑर्थर चाल्‍​र्स क्लार्क लिखते हैं, 'जिस प्रकार इस समय संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय अमेरिका में है। उसी प्रकार संयुक्त ग्रह राज्य संघ का मुख्यालय मंगल ग्रह या गुरु पर हो सकता है। सन् 1981 तक भारत अपने आप में शक्तिशाली हो जाएगा तथा वहां से एक ऐसी जबरदस्त विचार क्रांति उठेगी, जो पूरे विश्व को प्रभावित करेगी। भारत का धर्म और अध्यात्म पूरा विश्व स्वीकार करेगा।'
  • अमेरिका के भविष्य वक्ता चाल्‍​र्स क्लार्क के अनुसार- 20वीं सदी के अन्त से पहले एक देश विज्ञान की उन्नति में सब देशों को पछाड़ देगा परन्तु भारत की प्रतिष्ठा विषेशकर इसके धर्म और दर्शन से होगी, जिसे पूरा विश्व अपना लेगा। यह धार्मिक क्रान्ति 21वीं सदी के प्रथम दशक में सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करेगी और मानव को आध्यात्मिकता पर विवश कर देगी।
  •  स्वामी विवेकानंद ने भविष्यवाणी करते हुए कहा था- 'भारत का पुनरुत्थान होगा, पर वह जड़ की शक्ति से नहीं, वरन आत्मा की शक्ति द्वारा। वह उत्थान विनाश की ध्वजा लेकर नहीं, वरन शांति और प्रेम की ध्वजा से, संन्यासियों के वेश से, धन की शक्ति से नहीं, बल्कि भिक्षापात्र की शक्ति से संपादित होगा।' (विवेकानंद साहित्य पुस्तक, भाग 9 पृ. 380)।
  • स्वामीजी ने कहा- 'मैं अपने मानस चक्षु से भावी भारत की उस पूर्णावस्था को देखता हूं जिसका तेजस्वी और अजेय रूप में वेदांती बुद्धि और इस्लामी शरीर के साथ उत्थान होगा...। हमारी मातृभूमि के लिए इन दोनों विशाल मतों का सामंजस्य (हिन्दुत्व और इस्लाम) वेदांती बुद्धि और इस्लामी शरीर- यही एक आशा है।'
  •  खतरे में भारत :  सीमावर्ती राज्यों में हिन्दुओं पर हिंसा, जातिवाद की राजनीति और ईसाई एवं बौद्धों के धर्मान्तरण चक्र के चलते आने वाले समय में भारत का भविष्य खतरे में हो सकता है। हर राज्य आतंकवाद से ग्रस्त हो जाएगा। इसके चलते हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई और बौद्ध आदि सभी का भविष्य खतरे में होगा। कहते हैं कि हिन्दू घटा और देश बंटा। 
  •  हालांकि यह शोध पर आधारित भविष्यवाणी है जिसके सही होने की कोई गारंटी नहीं। फिर भी वक्त रहते यहां के लोग जागे नहीं तो कट्टरपंथियों का जोर होगा। प्यु रिसर्च केंद्र के द्वारा 70 देशों में किए गए अध्ययन के अनुसार जनसंख्या के रुझानों, भौगोलिक वितरण, प्रवास और धर्म परिवर्तन पैटर्न को देखते हुए विश्व में धार्मिक विनिर्देशों और परिदृश्य में भी तेज़ी से बदलाव आ रहा है तथा प्रजनन दर, जवानों की जनसंख्या, और इसी प्रकार धार्मिक परिवर्तन जैसे कारक से प्रभावित होकर भूगोल और विश्व की धार्मिक प्रकृति में नाटकीय परिवर्तन देखने को मिलेंगे।> > विभिन परिवर्तनों से प्रभावित होने वाले इन पैटर्न की बुनियाद पर वर्ष 2050 तक ईसाई धर्म से आगे निकलते हुए इस्लाम के विश्व में सबसे अधिक मानने वाले हो जाएंगे, लेकिन उनकी जिंदगी नारकीय होगी जबकि हिन्दू धर्म के मानने वालों की गिनती 1.4 अरब हो जाएगी और उसे तीसरा विश्व धर्म गिना जाएगा।
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  • इस दौरान ईसाई धर्म के द्वारा धन के बल पर गरीब मुल्कों में किए जा रहे धर्म परिवर्तन के कारण अधिकतर दूसरे धर्म के लोग आने वाले वर्षों में ईसाई धर्म की ओर आकर्षित होंगे। इस के साथ-साथ धर्म परिवर्तन पैटर्न को देखते हुए कहा जा सकता है कि इससे ईसाई धर्म को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना होगा, क्योंकि वे अपनी इस प्रक्रिया के तहत कई मुल्कों में जातिवादी संघर्ष को जन्म देंगे। इससे भारत को ज्यादा नुकसान होगा। धर्मान्तरण के कारण आने वाले समय में यहां ईसाई, बौद्ध और हिन्दू धर्म खतरे में होंगे।
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  • वर्तमान पैटर्न को देखते हुए भविष्यवाणी की जा रही है कि वर्ष 2050 तक 40 मिलियन लोग ईसाई धर्म की ओर आकर्षित होंगे। इसी के साथ-साथ ये भविष्यवाणी भी की जा रही है कि 106 मिलियन ईसाई धर्मी लोग दुसरे धर्मों की ओर आकर्षित होंगे। अध्ययन की बुनियाद पर हिन्दू धर्म अपनी आशा के विपरीत उत्तरी यूरोपी देशों और स्कैंडेनेविया में फैलेगा और पोस्ट सेकुलरिज्म वातावरण से प्रभावित होते हुए इस क्षेत्र के नागरिक अत्यंत समृधि का अनुभव करने के पश्चात् और उदारतावाद की बुराइयों को जानने के पश्चात् अपने धार्मिक खोखलेपन को दूर करने के लिए दुसरे धर्मों विशेष रूप से पूर्वी धर्मों की ओर आकर्षित होंगे। 
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  • इस बारे में कहा जा रहा है कि पश्चिमी देशों का इस्लाम के विरुद्ध प्रचार के कारण 97 मिलियन लोग हिन्दू धर्म की ओर आकर्षित होंगे। इसके विपरीत इन धर्मों के मानने वालों में से 36 मिलियन लोग दुसरे धर्मों की ओर आकर्षित हो जाएंगे। प्यु संस्था के विश्लेषण के आधार पर धर्म परिवर्तन के कारण 3 मिलियन इस्लाम से जुड़ जाएंगे और यहूदी और बौद्ध धर्म से क्रमानुसार 3 लाख और 3 मिलियन मानने वाले अलग हो जाएंगे।
  •  पीटर हरकौस (Peter Hurkos) : इस शताब्दी के महानतम भविष्यवक्ता पीटर हरकौस ने अपनी भविष्यवाणी में लिखा है कि 'भारत में आध्यात्मिकता तथा धार्मिकता की जो लहर उठेगी, वह सारे विश्व में छा जाएगी।'
  • फ्रांस के प्रसिद्ध विद्वान क्रूजर ने भारत के बारे में कहा था, 'यदि पृथ्वी पर कोई ऐसा देश है, जो स्वयं को मानव जाति का पालना होने की घोषणा करने का अधिकारी है अथवा प्रारंभिक सभ्यता का द्रष्टा है, जिसकी सभ्यता की किरणों ने प्राचीन विश्व के सभी भागों को आलोकित किया है, जिसने ज्ञान के वरदान से मनुष्य को द्विज बनाया है, प्राकृत से संस्कृत किया है, तो वह देश वास्तव में भारतवर्ष है।'
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  • जूल्स वर्ने (Jules Verne) :  जूल्स के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ेगी। बांग्लादेश बनेगा। अंत में पाकिस्तान एक छोटे से टापू जैसा रह जाएगा। इसका कुछ भाग अफगानिस्तान ले लेगा और कुछ में स्वतंत्र बलूचिस्तान बन जाएगा। भारत, चीन की ली गई भूमि वापस ले सकेगा। इसी समय तक तिब्बत भी स्वतंत्र हो जाएगा। बाद में चीन एटम बम बनाएगा। संपन्न देशों को हर्षल, प्लूटो आदि ग्रहों की भी विस्तृत जानकारी मिल जाएगी और मनुष्य शुक्र तथा मंगल ग्रह तक पहुंच जाएगा। भारत अत्यधिक शक्तिशाली बनकर उभरेगा। विश्व में उसका सम्मान बढ़ता चला जाएगा।  
  •  स्वामी शिवानन्द के अनुसार- आज विश्व में जो भी घटनाएं घटित हो रही हैं वह शास्त्रानुार पहले से ही सुनिश्चित है। भविष्य पुराण में भगवान वेद व्यास जी ने स्वयं भविष्यवाणी की है कि 4,900 शताब्दि कलियुग बीतने के पश्चात् भारत में बौद्धों का राज्य होगा, तदन्तर आद्य शंकराचार्य जी का प्रादुर्भाव के साथ ही वैदिक धर्म का प्रचार-प्रसार होगा और मनुस्मृति के आधार पर राजा राज्य करेंगें। पुनः 300 वर्षो तक भवनों तथा 200 वर्ष तक ईसाईयों का राज्य रहेगा। उसके बाद मौन (मत पत्रों) का राज्य रहेगा, जो 11 टोपी (राष्ट्रपति) तक चलेगा।  
  • यह क्रम लगभग 50 वर्ष तक चलेगा। इसके बाद से किसी भी पार्टी को बहुमत प्राप्त नहीं हो सकेगा। मंहगाई-भ्रष्टाचार बढ़ेगें। माता-पिता, साधु-सन्त, ब्राह्मण-विद्वान अपमानित होगें, तब भयानक युद्ध होगा। भारत पुनः अपने अस्तित्व में आकर विश्व गुरु पद पर स्थापित होगा। भारत में शास्त्रानुसार पुनः राज्य परम्परा की स्थापना होगी।-(राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र, वाराणसी, 8 सितम्बर, 1998)  
  • विश्व महान विचारक क्या कहते हैं जानें :
  • 1. लियो टॉल्स्टॉय (1828-1910): हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन पूरी दुनिया पर राज करेगा क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है।'
  • 2. अल्बर्ट आइंस्टीन (1879-1955): मैं समझता हूं कि हिंदुओं ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया है जो यहूदी न कर सकें, हिन्दुत्व में ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है।'
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  • 3.जोहान गीथ (1749-1832): 'हम सभी को अभी या बाद में हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा। यही असली धर्म है, मुझे कोई हिन्दू कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा। मैं इस सही बात को स्वीकार करती हूं।
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  • 4. हर्बर्ट वेल्स (1846-1946): हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिणत पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी। तभी एक दिन पूरी दुनिया इसकी ओर आकर्षित हो जाएगी और उसी दिन ही दिल शाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी सलाम हो उस दिन को।
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  • 5. हसटन स्मिथ (1919-2016): 'जो विश्वास हम पर है और हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है। अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी।'
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  • 6.माइकल नोस्टरीडाम (1503-1566): 'हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा।'
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  • 7.बर्ट्रेंड रसेल (1872-1970): 'मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है, हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे। एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा।'
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  • 8. गोस्टा लोबोन (1841-1931): 'हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है। सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ।'
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  • 9.बर्नाड शॉ (1856-1950): 'सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी, अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा।'
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